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भारत का दुर्लभ सिक्का घोटाला: ऑनलाइन ठगी में गंवाए लाखों रुपये

Rare coin scam in India – victims lose money to online fraud

भारत में दुर्लभ सिक्का घोटाले (Rare Coin Scam in India) तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर चमकदार विज्ञापनों का इस्तेमाल करके लोगों को जाल में फँसा रहे हैं। कई लोग पुराने सिक्कों के बदले भारी रकम मिलने के लालच में ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार होकर लाखों रुपये गंवा चुके हैं। ये ठगी भरोसा जीतने, झूठी जल्दीबाजी पैदा करने और बार-बार पैसे वसूलने के बाद अचानक गायब हो जाने की रणनीति पर आधारित होती है।

पिछले कुछ महीनों में भारत में सिक्का-सम्बंधित धोखाधड़ी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। यह आमतौर पर फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर चमचमाते विज्ञापनों से शुरू होती है, जिनमें दावा किया जाता है कि पुराने सिक्कों के बदले लाखों या करोड़ों रुपये मिलेंगे। इन विज्ञापनों में अक्सर नकली RBI या UNESCO लोगो, फर्जी प्रशंसापत्र और आकर्षक ग्राफिक्स होते हैं। पहली नज़र में यह सब असली लगता है और लोग आसानी से जाल में फँस जाते हैं।

जब कोई व्यक्ति इन विज्ञापनों पर प्रतिक्रिया देता है, तो ठग अपने आपको RBI अधिकारी, प्राचीन सिक्का संग्राहक या संग्रहालय प्रतिनिधि बताकर संपर्क करते हैं। वे आत्मविश्वास से बातें करते हैं, नकली पहचान पत्र दिखाते हैं और तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल कर विश्वास जीतते हैं। इसके बाद ये “विशेषज्ञ” सिक्कों का मूल्यांकन करते हैं और दावा करते हैं कि सिक्के बेहद कीमती हैं—कभी-कभी 10 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा। यह दावा पीड़ित को उत्साहित कर देता है और वह सोचता है कि उसकी किस्मत बदलने वाली है।

यहीं से असली ठगी शुरू होती है—पैसे माँगने का खेल। पीड़ितों से पंजीकरण शुल्क, सत्यापन खर्च, RBI क्लियरेंस सर्टिफिकेट, कूरियर शुल्क या बीमा शुल्क जैसी मदों के नाम पर पैसे माँगे जाते हैं। शुरुआत में रकम छोटी होती है—₹2,000, ₹5,000 या ₹10,000—ताकि यह वाजिब लगे। लेकिन एक बार भुगतान कर देने के बाद और पैसे माँगे जाते हैं। ठग अक्सर जल्दीबाजी का माहौल बनाते हैं, कहते हैं—“खरीदार तैयार है, बस क्लियरेंस का इंतज़ार है” या “देरी हुई तो डील कैंसिल हो जाएगी।”

लाखों रुपये मिलने की उम्मीद में कई लोग बार-बार UPI या बैंक खातों के जरिए पैसे भेजते रहते हैं। कुछ तो दोस्तों या परिवार से कर्ज लेकर भी भुगतान करते हैं। लेकिन जब ठग अपना मकसद पूरा कर लेते हैं, तो वे अचानक गायब हो जाते हैं। कई मामलों में, अगर पीड़ित सवाल करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी जाती है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि ये घोटाले सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। ये लोगों की अनजानगी का फायदा उठाते हैं और बिटकॉइन जैसी डिजिटल करेंसी की लोकप्रियता का हवाला देकर लोगों को यकीन दिलाते हैं कि कोई भी पुराना सिक्का बेहद कीमती हो सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ऐसे किसी लेन-देन में शामिल नहीं होता और न ही सिक्कों की जांच के लिए कोई शुल्क लेता है।

किन संकेतों से सावधान रहें?

  • अग्रिम भुगतान की माँग
  • नकली अधिकारी या संस्थान का नाम लेना
  • अवास्तविक दावे, जैसे करोड़ों रुपये मिलने का वादा
  • तुरंत कार्रवाई करने का दबाव

सबक साफ है: अगर कोई ऑफर सुनकर सच होने के लिए बहुत अच्छा लगे, तो समझ लें कि वह धोखा है। सतर्क रहना और जानकारी की जांच करना ही इस खतरनाक ठगी से बचने का एकमात्र तरीका है।

👉 To understand more about online fraud, read our guide on how to avoid cybercrime in India

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