Amit Shah vs Rahul Gandhi in Bihar चुनावी मुकाबला इस बार पहले से ज़्यादा दिलचस्प हो गया है।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल बिहार की जनता को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
दोनों नेताओं के तीखे भाषणों से यह साफ है कि बिहार की राजनीति अब विकास बनाम वादों पर केंद्रित हो चुकी है।गृहमंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषणों ने बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है।
अमित शाह का हमला: “कांग्रेस सिर्फ वादों की फैक्ट्री”
अमित शाह ने अपने चुनावी दौरे के दौरान कहा कि कांग्रेस ने बिहार को हमेशा गुमराह किया।
उनका कहना था कि “कांग्रेस सिर्फ वादों की फैक्ट्री है, काम का नाम नहीं।”
शाह ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयाँ हासिल की हैं — चाहे वह इंफ्रास्ट्रक्चर हो, रोजगार हो या गरीबों के लिए योजनाएँ।
“बिहार अब पिछड़ा नहीं, बल्कि उभरता हुआ राज्य है।” – अमित शाह
राहुल गांधी का पलटवार: “बीजेपी ने सिर्फ वादे बेचे, भरोसा तोड़ा”
दूसरी तरफ राहुल गांधी ने भी जवाबी हमला बोला।
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने युवाओं से रोजगार का वादा किया, लेकिन दिया सिर्फ जुमला।
राहुल गांधी ने किसानों, बेरोजगारों और महंगाई के मुद्दों को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा।“हम जनता की सरकार लाएंगे, जो काम करेगी, वादे नहीं बेचेगी।” – राहुल गांधी
जनता का मूड: मुद्दे बनाम चेहरे
बिहार की जनता इस बार काफी सजग दिखाई दे रही है।
कई मतदाताओं का मानना है कि अब सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि काम देखकर वोट देने का समय है।
जहाँ बीजेपी विकास और स्थिरता की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस बेरोज़गारी और सामाजिक न्याय को बड़ा मुद्दा बना रही है।बड़े मुद्दे क्या हैं?
- रोजगार और शिक्षा – युवाओं की सबसे बड़ी चिंता।
- महंगाई – हर घर को प्रभावित करने वाला मुद्दा।
- बुनियादी ढाँचा (Infrastructure) – गाँवों और छोटे शहरों में विकास कितना हुआ?
- सामाजिक न्याय और आरक्षण – कांग्रेस और सहयोगी दल इस पर फोकस कर रहे हैं।
एनडीए (BJP+JDU) और INDIA गठबंधन (Congress+RJD) दोनों ही अपनी रणनीतियाँ तेज़ कर रहे हैं।
अमित शाह और राहुल गांधी दोनों के दौरे इस बात का संकेत हैं कि बिहार की सीटें दिल्ली की राजनीति में निर्णायक साबित हो सकती हैं।
अमित शाह और राहुल गांधी के भाषणों से साफ है कि बिहार 2025 की चुनावी जंग अब भावनाओं, मुद्दों और विकास — तीनों पर लड़ी जाएगी।
जहाँ बीजेपी “विकास और स्थिरता” का कार्ड खेल रही है, वहीं कांग्रेस “रोजगार और जनहित” का नारा दे रही है।
आने वाले महीनों में यह मुकाबला और भी रोचक होने वाला है।
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