सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर HDFC बैंक की एक महिला रिकवरी एजेंट को CRPF के जवान से लोन रिकवरी को लेकर फोन वार्तालाप करते हुए सुना जा सकता है। बातचीत के दौरान जवान ने ब्याज दर, प्रोसेस आदि पर सवाल उठाया, जिसके बाद एजेंट ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और व्यक्तिगत टिप्पणी की। India TV+1
वायरल ऑडियो में यह भी कहा जा रहा है कि जवान की पारिवारिक स्थिति, उनकी पेशेवर जिम्मेदारियाँ (सरहद पर तैनाती) और बच्चों को लेकर अपमानजनक बातें की गईं। India TV+1
ऑडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तेज प्रतिक्रिया हुई। लोगों ने एजेंट की कार्यप्रणाली, बैंक की जवाबदेही और सैनिकों के प्रति सम्मान की आवश्यकता पर सवाल उठाए। India TV+1
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बैंक ने इस महिला कर्मचारी से संबंधित होने की खबरों को खारिज किया है। बैंक ने साफ किया है कि वायरल क्लिप में होने वाला व्यवहार संस्था की नीति के अनुरूप नहीं है। Indiatimes+1
- HDFC बैंक ने इस मामले में कहा है कि वह ऑडियो और घटना की पूरी तरह से जांच करेगा। India TV+1
- बैंक का दावा है कि उक्त महिला कर्मचारी, अनुराधा वर्मा, बैंक की अधिकारी नहीं हो सकती है या कम से कम बैंक ने पुष्टि नहीं की है कि वह कर्मचारी है। India TV+1
- इसके अलावा, लोगों ने रिकवरी एजेंटों के प्रशिक्षण और संवेदनशीलता की कमी पर ध्यान देने की मांग की है, खासकर जब सामने कोई सैनिक हो जो देश सेवा कर रहा हो। Live Hindustan+1
- यह घटना नागरिकों और विशेष रूप से सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
- बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में रिकवरी एजेंटों की भाषा, आचरण और जवाबदेही के मानदंडों की समीक्षा की सम्भावना बढ़ सकती है।
- इस तरह की घटनाएँ सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं, क्योंकि सुरक्षा बलों से जुड़े मामलों में सम्मानित व्यवहार की उम्मीद होती है।
CRPF जवान और HDFC के बीच लोन रिकवरी कॉल विवाद ने केवल एक वायरल घटना नहीं बनाई है बल्कि बैंक एजेंसियों के आचरण और बैंकिंग क्षेत्र की जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दे सामने लाए हैं। भविष्य में इस तरह की असभ्य भाषा और व्यवहार से बचने के लिए पारदर्शिता, प्रशिक्षण और संस्थागत जवाबदेही आवश्यक है।
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